पूर्णिया(निस)शहर का चर्चित पुनीत हत्याकांड के दो अभियुक्तों को न्यायालय ने मंगलवार को उम्र कैद की सजा सुनायी, साथ ही 5.50 लाख का अर्थ दंड भी दिया!न्यायालय इस मामले में दोनों आरोपियों के खिलाफ हत्या के इस मामले में पहले ही दोष सिद्ध कर चुका है। इन दोनों अभियुक्तों को एडीजे प्रथम सत्येन्द्र रजक ने 6 जून को दोषी करार देते हुए फैसला सुरक्षित रख लिया था! मंगलवार को माननीय अपर जिला सत्र न्यायाधीश (प्रथम श्रेणी) ,पूर्णियाॅ के न्यायालय के द्वारा चर्चित पुनीत हत्या कांड के अभियुक्त (1) नीरज यादव एवं (2) किशोर कुमार को त्वरित विचारण के क्रम में धारा- 364(ए) भा0द0वि0 के अन्तर्गत दोषी मनाते हुए आजीवन कारावास एवं 1,00,000 तथा धारा-302 भा0द0वि0 में आजीवन कारावास एवं 2,00000 और धारा- 120(बी) भा0द0वि0 में आजीवन कारावास एवं 1,00000 तथा धारा-201 भा0द0वि0 में 07 साल एवं 50,000 रूपये का जुर्माना की सजा सुनाया गया है।पूर्णिय यह मामला सत्रवाद विचारण संख्या 417/15 केहाट मरंगा थाना कांड संख्या 517/1 5 के तहत दर्ज है। इस मामले में प्राथमिकी मृतक पुनीत कुमार के चाचा अमित रंजन ने तीन अगस्त 2015 को थाने में दर्ज कराई थी।
न्यायालय ने पुनीत कुमार की हत्या में दो अभियुक्तों नीरज यादव और किशोर कुमार को रंगदारी के लिए अपहरण करना साजिश के तहत हत्या और साक्ष्य छिपाने के लिए शव को फेंक देने के मामले में दोषी पाया है। न्यायालय ने दोनों अभियुक्तों को धारा 364ए, 302, 120 बी और 201 भादवि के तहत दोषी पाया है। दर्ज प्राथमिकी के अनुसार घटना तिथि तीन अगस्त 2015 को दोपहर साढ़े 12 बजे सूचक और पुनीत दोनों मोटर साइकिल से मरंगा बायपास की ओर जा रहे थे। जब मोटर साइकिल से उफरैल स्कूल के पास पहुंचे तो दोनों अभियुक्तों ने मोटर साइकिल रोक दिया। पुनीत का कॉलर पकड़कर बोला कि इतना पैसा कमाते हो रंगदारी दो और गाली-गलौज करने लगे। पुनीत के कहने पर कि इतना रंगदारी कहां से देंगे तो दोनों अभियुक्तों ने कहा रंगदारी नहीं देगा तो अपहरण कर लो। नीरज यादव के सफेद मारूति कार (बीआर-11एम-4242) पर जबर्दस्ती पुनीत को बैठा लिया गया। विरोध करने पर दोनों ने पिस्तौल तान दिया। जिससे सूचक पीछे हट गया। पुनीत को मारते-पीटते गाड़ी पर बिठा गाड़ी को उफरैल चौक की ओर ले गये। हो-हल्ला और पीछा किया तो गाड़ी नेवालाल चौक की ओर मुड़ गयी। इसके बाद उसे अपने कामत में ले जाकर हत्या कर दी गई और शव को फेंक दिया गया। शाम में चित्त लेटा हुआ शव लालगंज स्थित एक खेत में बरामद किया गया।
इस घटना के बाद लापरवाही बरतने के आरोप में मरंगा के तत्कालीन थाना अध्यक्ष अनिल गुप्ता को पुलिस अधीक्षक ने तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया था। पुनीत की हत्या कर शव को ठिकाने लगाने के बाद भागने के क्रम में नीरज यादव एवं किशोर कुमार को उसी दिन गिरफ्तार कर लिया गया था। घटना के बाद आक्रोशित लोगों ने सड़क जाम एवं विरोध प्रदर्शन भी किया था। जिसके बाद हरकत में आई पुलिस ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए इस मामले में तत्काल आरोप पत्र न्यायालय में समर्पित किया था। घटना के बाद पुलिस ने इस मामले में महज दस दिनों में न्यायालय में आरोप पत्र समर्पित कर दिया वहीं महज छह के दौरान स्पीडी ट्रायल कराकर इस मामले के दोनो आरोपियों को न्यायालय से सजा दिलायी गई! ---------------------------------- सहरानीय रहा पूर्णिया एसपी काकदम
पुलिस अधीक्षक,पूर्णियाॅ निशांत कुमार तिवारी (भा0पु0से0) के निर्देशन में कांड प्रतिवेदित होने के मात्र 09 दिनों के अन्दर अनुसंधान पूर्ण कर कराते हुए माननीय न्यायालय में आरोप पत्र समर्पित कराया गया था।
हत्या कांड से मृतक के परिजन भयभित थे।पुलिस अधीक्षक स्वयं मृतक के घर गये तथा मृतक के परिजनों से मुलाकात कर उन्हें हर संभव मद्त का आश्वासन दिये तथा
उन्हें उचित सुरक्षा मुहैया कराये। जिसके फलस्वरूप मृतक परिजन एवं अन्य साक्षियों द्वारा न्यायालय में भयमुक्त होकर गवाही दी गई। तथा पुलिस पक्ष द्वारा मात्र दो (02) माह के अन्दर सभी साक्ष्यों को माननीय न्यायालय में कलमबद्ध कराया गया।
पूर्णियाॅ पुलिस द्वारा उक्त हत्या कांड में की गई त्वरित कार्रवाई से ना केवल मृतक के परिजनों में सुरक्षा की भावना तथा आमजनों एवं प्रबुद्धजनों में भी पुलिस के प्रति विश्वास का भाव जागृत हुआ है।
पुलिस अधीक्षक,पूर्णियाॅ निशांत कुमार तिवारी (भा0पु0से0) के निर्देशन में कांड प्रतिवेदित होने के मात्र 09 दिनों के अन्दर अनुसंधान पूर्ण कर कराते हुए माननीय न्यायालय में आरोप पत्र समर्पित कराया गया था।
हत्या कांड से मृतक के परिजन भयभित थे।पुलिस अधीक्षक स्वयं मृतक के घर गये तथा मृतक के परिजनों से मुलाकात कर उन्हें हर संभव मद्त का आश्वासन दिये तथा
उन्हें उचित सुरक्षा मुहैया कराये। जिसके फलस्वरूप मृतक परिजन एवं अन्य साक्षियों द्वारा न्यायालय में भयमुक्त होकर गवाही दी गई। तथा पुलिस पक्ष द्वारा मात्र दो (02) माह के अन्दर सभी साक्ष्यों को माननीय न्यायालय में कलमबद्ध कराया गया।
पूर्णियाॅ पुलिस द्वारा उक्त हत्या कांड में की गई त्वरित कार्रवाई से ना केवल मृतक के परिजनों में सुरक्षा की भावना तथा आमजनों एवं प्रबुद्धजनों में भी पुलिस के प्रति विश्वास का भाव जागृत हुआ है।