कमिटी भंग होने के बाद भी अध्यक्ष ने बेटे और दामाद की बहाली कर दी
किशनगंज(निस) ठाकुरगंज प्रखंड मुख्यालय से 18 किमी पर है मदरसा निचितपुर हाट, मदरसा नम्बर 991 जो पछले 2 वर्ष से विवादों के घेरे में है ।यहाँ पर 30 वर्ष से चल रहे प्रबंध कमिटी के मनमाना रवैया के चलते क्षेत्र के लोगों आजिज हो गये है! क्षेत्र के लोग एकजुट होकर भ्रष्ट कमिटी के खीलाफ बिगुल फुक दिया है! लोगो का कहना है की मदरसा को अपने मनमाना ढंग से चलाते हुए कमिटी राजनीती का अखाड़ा बना दिया । इस संबंध में यहाँ पर जब ग्रामीणों से संपर्क किया गया तो मोहम्मद रफीक आलम, शफीउर्रहमं, मोहम्मद शहीद, मोहम्मद हुसैन,अब्दुल मजीद, इसराइल अब्दुल कय्यूम, यूनुस आलम, वार्ड सदस्य अबू अहमद, नजीरुद्दीन इत्यादि का कहना है कि 30 वर्षीय कमिटी के अध्यक्ष के मनमाना रवैये से तंग आकर कमिटी के सदस्य अयूब आलम, डॉ अब्दुल माजिद, सुल्तान आलम, सचिव अलीमुद्दीन ने अपना अपना लिखित इस्तीफा मदरसा बोर्ड एवं हेड मोलवी को सौप दिया है!पुराने कमिटी में अब केवल दो सदस्य ही रहे परंतु कमिटी के सदस्य के इस्तीफा के बाद भी पहले कमिटी के अध्यक्ष श्री कलीमुद्दीन ने बेगैर इंटरवियू के मदरसा में हाफिज और मोलवी की बहाली कर दी! दोनों रिक्त दोनों पद पर अपने लड़के एवं दामाद को बहाली कर दी।इसके विरुद्ध में मदरसा बोर्ड को इनकी सूचना प्रधान मोलवी मुखिया सरपंच समिति और ग्रामीणों द्वारा देने के पश्चात भी कोई हल नहीं निकाला । बताते चले की 30 वर्षीय कमिटी के अध्यक्ष मदरसा की आमदनी को अपनी दिमाग की आमदनी बताते है! अपने अलावा किसी अन्य सदस्य या पदाधिकारी को कोई अहमियत नहीं देते है! यहाँ तक की अध्यक्ष के दबंगई से ग्रामीण भी परेशान है! अध्यक्ष के पुत्र को मदरसा में बहाल होने के बाद यह भी अपने पिता के समान मदरसा में हुक्म चलाते है जैसे मदरसा के बच्चों को कोई गलती हो जाने से मुर्गा बनाना धुप में खड़ा कर देना रूम से एक दो घंटे बाहर निकल देना है ।जिसके कारण अधिक से अधिक बच्चे डर से मदरसा आना बन हो गए है ।एक तरफ सरकार द्वारा सर्व शिक्षा अभियान चला कर तमाम बच्चे को शिक्षा से जोर रही रही है । वही दूसरी तरफ अध्यक्ष के हिटलरशाही रवैये से मदरसा की पढाई चौपट हो रही है! इन सब बातों से तंग आकर अब ग्रामीणों ये आवाज उठाई की जबतक नई कमिटी नहीं बनेगी तबतक यहाँ पर शांति नहीं होगी ।इन सारी मुद्दों को लेकर ग्रामीणों ने नई कमिटी चुनकर अनुमोदन के लिए मदरसा बोर्ड को दे दी है ।
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गुरुवार, 6 अक्टूबर 2016
दो वर्ष के बाद भी नहीं सुलझी मदरसा निचितपुर का विवाद
