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सोमवार, 22 अगस्त 2016

एम्स से ज्यादा जटिल है पूर्णिया सदर अस्पताल में इलाज कराना

एक कहावत है जहर खाऊ न माहूर खाऊ, मरे के हो तो पूर्णिया जा! अब यह बदलकर मरे के हो तो पूर्णिया सदर अस्पताल जाव हो गया है! पूर्णिया सदर अस्पताल में इलाज कराना जंग जितने के बराबर है!यहाँ इलाज कराने की इतनी जटिल प्रक्रिया है की एम्स भी इसके सामने फ़ैल है! आउटडोर में इलाज कराने से पहले लाइन लगने की प्रक्रिया रोगियो के लिए आसान नहीं है, या तो तंग होकर प्राइवेट में भाग जाते है या फिर अल्लाह को प्यारे हो जाते है!

केस न 1--- 
 अस्पताल में सुदूर गाँव से लेकर शहर तक लगभग 5 हज़ार रोगी रोजाना इलाज कराने आते है, मगर रोगियो के लिए लाइन लगकर अपना निबंधन कराना मौत को गले लगाने के बराबर है! रोगियो के निबंधन के लिए सदर अस्पताल में सिर्फ 2 काउंटर बने हुए है जिसमे सैकड़ो रोगी सुबह 8 बजे से 12 बजे तक लाइन में लगकर अपना निबंधन कराते है! कई रोगी घंटो लाइन में लगे रहने से चक्कर खाकर गिर जाते है! अगर 12 बजे से पहले आपका नंबर आ गया तो ठीक वरना 12 बजकर एक मिनट होने पर ही निबंधन काउंटर बंद हो जाता है, अब इन रोगी को शाम 4 बजे का या फिर सुबह का इंतज़ार करना पड़ता है! कल फिर उसी प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है!

केस न 2
अगर आप निबंधन कराने में कामयाब हो गए तो फिर डॉक्टर को दिखाने के लिए खड़ी लाइन को देखकर रोगी को कोई और बिमारी हो जाती है! बाहर निबंधन काउंटर से दुगुना भीड़ रहती है यहाँ भी अगर आप 11 बजे तक दिखाने में कामयाब हो गए तो ठीक वर्ना 11 बजकर 1 मिनट पर डॉक्टर उठ जाते है!

केस न 3
अगर आप डॉक्टर को दिखाने में भी कामयाब हो गए तो फिर पैथलॉजी जाँच की सिर्फ पर्ची लेने के लिए फिर लंबी कतार में लगनी पड़ेगी! यहाँ तो समय और भी कम है क्योंकि जो भी वक़्त था आपके पास वो तो निबंधन कराने, डॉक्टर को दिखाने में चला गया! यहाँ जड़ा सा भी लेट का मतलब है आपका सब मेहनत बेकार! यहाँ भी मुख्य कानून चलता है 12 बजने के बाद कर्मी काउंटर की खीड़की बंद कर देते है! ऐसी स्थिति में पैसा रहने पर बाहर दिखाना ही रोगी के पास विकल्प बचता है

केस न 4
 अब बारी आती है टेस्ट कराने की, अल्ट्रासाउंड कराने वाले रोगियो को वही पुनः उसी तरह लाइन में लगकर निबंधन कराना होता है फिर जाँच के लिए लाइन में लगना पड़ता है जो 1 से 2 घंटे की प्रक्रिया है! उसके बाद पैथलॉजी के लिए भी उसी प्रकार नंबर के दौड़ से गुजरना पड़ता है, यहाँ सुखद बात यह है की लेट चाहे जितना भी हो मगर आपका जाँच हो जायेगा! मगर सभी जाँच रिपोर्ट दूसरे दिन आपको मिलेगा

केस न 5
 डॉक्टर को दिखा लेने जाँच करा लेने के बाद अपने आप को खुशनसीब न समझे, क्योंकि अभी आपको सभी रिपोर्ट को दिखाकर दवाई लिखाना है! और इसके लिए पुनः उसी प्रकार डॉक्टर को दिखाने वाले लाइन में लगना पड़ेगा! टाइम से अगर उस वक़्त तक डॉक्टर के पास पहुँच गए तो आपका दवाई लिखा जायेगा नहीं तो शाम 4 बजे या कल सुबह का इंतज़ार करे!

केस न 6
 दवाई लिखवाने के बाद सबसे टेढ़ी खीर है दवाई लेना! यहाँ का लाइन देखकर आपके पाँव के नीचे का जमीन खीसक जायेगा! यहाँ भी सब समय के पावंद है! 12 बजते ही दवाई वितरण का कार्य बंद हो जाता है! यहाँ भी आपको शाम 4 बजे पुनः लाइन लगना पड़ेगा या कल सुबह का इंतज़ार करना पड़ेगा! अगर आप दवाई काउंटर तक पहुँच भी गए तो वहा आप अपना सर पीट लेंगे, अगर डॉक्टर ने सात प्रकार की दवाई लिखी है तो सिर्फ दो प्रकार की दवाई ही मिल पायेगी बाकी सब बाहर से ख़रीदे!

ऐसी स्थिति में मरीज बाहर से ही अपना इलाज कराना बेहतर समझते है! जो गरीब है उसे इन सारी प्रक्रिया को पूरा करते करते तीन दिन के बाद ही दवा मिल पाती है! ऐसे में या तो मर्ज बढ़ जाती है या मरीज ही ऊपर चला जाता है!
News By - मोहित पंडित